Tuesday, March 13, 2012

Teacher - An Actor - 2



शिक्षक: बहुत दिन हो गए कुछ नया नहीं किया अपन लोगो ने. 

बच्चे: Yes सर 

शिक्षक:  तो ठीक है आज सब लोग कविता बनायेंगे| 

बच्चे : क्या?? हम?? कैसे?? हमे नहीं आता कविता बनाना| हम नहीं बना रहे| सर कुछ आसन काम बताओ|

शिक्षक:  अरे कविता बनाना तो बहुत आसन काम है| बस एक टोपिक सोच लो  और कर दो शुरू लिखना|
( बच्चे अभी तक शिक्षक की दलील से सहमत नहीं हुए थे| वो अभी भी न नुकुर कर रहे थे| )

एक बच्चा- सर मुझे कविता बनाना नहीं आता | 

शिक्षक- अरे वाह! क्या नाम रखा है तुमने कमाल कर दिया अब कविता का नाम तो फिक्स हो गया -
                              " मुझे कविता बनाना नहीं आता"
           अच्छा रवि अगली लाइन तुम बताओ
रवि - सर !!!
(पूरी क्लास रवि की तरफ दया भाव से देख रही थी और excite भी हो रही थी की रवि क्या बोलेगा |)

शिक्षक- बोलो रवि बोलो |
रवि- नहीं आता, नहीं आता

शिक्षक - लो मिल गयी लाइन
           - "नहीं आता , नहीं आता, मुझे कविता बनाना नहीं आता|"
          - सौरभ अगली लाइन तुम बनाओ |

सौरभ-   "पर टीचर मुझको सिखलाते हैं |"

शिक्षक - आज से सौरभ का नाम बदल कर कविराज सौरभ कर देते है| क्या लाइन बनायीं है
(अब तक पूरी क्लास excited हो चुकी थी और मन ही मन अगली लाइन सोच रही थी|)

शिक्षक - सुधांशु तुम बनाओ अगली 

सुधांशु- "मेरे डर को मार भगाते हैं|" (खुश होते हुए पूरी क्लास पर इस तरह नज़र डालता है की जैसे कोई किला जीत लिया हो |)

शिक्षक- अच्छा अगली लाइन अsss- -- कौन बताएगा ??
(सारी क्लास confuse थी, कभी हाथ ऊपर करते तो कभी हाथ नीचे, फिर पड़ोस वाले को बताते की देख मैंने ये बनाई)
अच्छा अगली लाइन शिल्पा बताएगी

 शिल्पा- "मुझ को नयी राह दिखाते हैं |" (कृतज्ञ भाव से मुस्कराते हुए बैठ जाती है)

शिक्षक - मुझे लगता है की ये क्लास तो कवियों से भरी पड़ी है| कहाँ थे तुम लोग अब तक ?

कुलदीप ( आँखे मटकाते हुए) - सर आप नहीं मिले न आज तक!!

शिक्षक - अच्छा भाई अच्छा अब अगली लाइन पर आते हैं अब किसका नंबर लेना हैं ?? निरिष जरा देखे तो तुमने क्या बनाया हैं ?

निरिष -  (अब तक तैयारी कर चुका था, उछलते हुए खड़ा हो के बोला) - "सब को कविराज बनाते हैं |"

इतने में ही घंटी बजती है- किसी का मन नहीं था आज अगली क्लास में जाने का सब की creativity बाहर फूटने  लगी थी, सभी के मन में अचिएवेमेंट की फीलिंग थी मन प्रसन था, उछलने का मन कर रहा था | सब ने मिल के कविता बनाना शुरू कर दिया था जो कुछ ऐसी थी - 
                                                         " मुझे कविता बनाना नहीं आता
                                            नहीं आता , नहीं आता, मुझे कविता बनाना नहीं आता|
                                            पर टीचर मुझको सिखलाते हैं, मेरे डर को मार भगाते हैं|
                                            मुझ को नयी राह दिखाते हैं, सब को कविराज बनाते हैं |"

शिक्षक-  (जाते हुए) अच्छा चलो सब के लिए एक काम हैं आज हमारी कविता पूरी नहीं हुई कल सब लोग पूरी बना के लायेंगे और क्लास में सब को सुनायेंगे 
आज सब लोग वह सीख गए थे जो किताब कभी नहीं सिखा पाती | फिर सब ने दिन रात लग कर कविता बनाई और अगले दिन सबको सुनाने का आनंद और इनाम पाया|

Courtesy - चंद्रशेखर सर ( my class teacher of class 9)

Saturday, March 3, 2012

Teacher - An Actor

                                                           शिक्षक - एक अभिनेता

राहुल - सर मे आई कमइन ?


टीचर - अब ? क्लास खत्म होने में १० मिनट है, अगली क्लास के लिए तो जल्दी आ गए आप।


राहुल(रोना शुरू करते हुए ) - सर, आज मरते मरते बचा हूँ । आते आते वो ट्रक (सिसकते - २ ) वो ट्रक से टक्कर लगते - २ बच गयी ।
(राहुल का रोना तेज हो गया ।)

टीचर(स्थिति समझते हुए ) -  अरे ! कैसे हुआ पूरा बताओ ?


राहुल - सर में सड़क पार कर रहा था, इतने में एक ऑटो वाले ने तेज कट मारा और ट्रक ने टक्कर बचाने के लिए मोड़ा तो में जस्ट टकराते - २ बचा, ( रोना फिर तेज हो गया )

टीचर - बच्चो आज मुझे बड़े दुःख के साथ कहना पद रहा है कि राहुल आज ट्रक से टकराते - २ जिन्दा बच गया और इसलिए हम सब २ मिनट का मौन रखेंगे
   सारी क्लास ठहाके मार के हंसने लगी ।
   जो राहुल अब तक रोये जा रहा था उसका मुंह भी खुला का खुला रह गया और वो सर को घूरने लगा ।


राहुल - सर ये आप क्या कह रहे हो । 


टीचर - अरे भई हम तो तुम्हारे दुःख में तुम्हारा साथ दे रहे हें, रोना तुम ने शुरू किया तो हमें लगा कि दुःख कि बात है कि तुम जिन्दा बच गए तो हम भी दुःख मना लें । तुम ही बताओ तुम्हारा बचना दुःख कि बात है या ख़ुशी कि ? 
राहुल के भाव बदलने लगे 


राहुल - सर है तो ख़ुशी कि बात पर वो ट्रक....


टीचर - अरे भाई, तुम्हे आज खुश होना चाहिए कि तुम्हे नयी जिन्दगी मिली और तुम घबराये जा रहे हो, क्या होगा घबराने से ? चलो अब मुंह धो के आओ और मस्त हो के बैठो फिर दोस्तों को तुम्हारी कहानी चाव से सुनाओ, रोते हुए नहीं ।( मुस्कुराते हुए सर चले गए ) 


क्लास के १० मिनट ख़त्म हो चले थे पर सब को जीवन का एक अच्छा सबक मिला " हर पल को हँसते हँसते जियो , ग़मों को खुशियों में बदलो क्योंकि उन से ही जीत कर तो हम आगे बढे हें ।